Chandubi Lake|| Maduki Bazaar|| Visiting Place in Guwahati|| Chandubi Lake trip ||

CHANDUBI LAKE –

Chandubi Lake is located at the foothills of garo Mountain. It is formed by earthquake in Assam on 12 June 1897. Due to earthquake, forest went down and formed Lake. It is famous for it’s natural beauty and lagoon formed under water. The area is surrounded by small and very Clean villages and dense forest. This region is the hub of areca nut(supari) and tea. You can see so many tea gardens on the way. There are so many trees of areca nut.

How to reach Chandubi Lake –

The distance from the city is about 60 km. You can go by taxi or by your own vehicle two wheeler or four wheeler. Road connectivity is very good. When I went (17 Dec 21) there, that time road work (National Highway) was in progress. Bus service also provided from maligaon and from Mirza to maduki village near to the lake.

Best time to visit –

There is a traditional fair called chandubi festival is celebrated in the month of January from 01 to 05 Jan. So this is the best time to visit. In winter season you can see migratory birds which make your tour memorable.

Maduki bazaar –

There is a small village near to the lake named Maduki. On every Saturday Maduki bazaar is set up there where you can purchase traditional items. I eat momos there and purchase a bedsheets.

Tickets –

The ticket price For boating is 50 rs per person.There is no extra charge for photography and videography.

This is a picnic spot. Picnic spot area ticket is rs 20 for vehicle. Young couples visit here for pre wedding shoot. The person who is interested in photography must visit at once. Over all this place is one time visit. You can feel very relax in neutral beauty..

इतिहास || प्रागैतिहासिक काल|| आद्यएतिहासिक काल|| ऐतिहासिक काल || पाषाण काल || इतिहास को कितने भागों में बांटा गया है||

इतिहास की परिभाषा

इतिहास का अगर हम संधि विच्छेद करें तो यह (इति+ह+आस) होता है जिसका अर्थ है “यह निश्चय था”। ग्रीस के लोग इसे हिस्तरी बोलते थे जिसका अर्थ है “बुनना”। यानी कि किसी भी ज्ञात घटनाओं को सुसज्जित ढंग से व्यवस्थित करना। इतिहास को अलग-अलग इतिहासकारों ने अपने-अपने रूप से परिभाषित किया है, किंतु सबका मत इस पर है कि “प्राचीन काल से नवीन काल की ओर आने वाली मानव जाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास कहलाता है” इतिहास का जनक हेरोडोटस को कहा जाता है

इतिहास को मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित हैं-

  1. प्रागैतिहासिक
  2. आद्यएतिहासिक
  3. ऐतिहासिक

1.प्रागैतिहासिक (Pre-historic)-

यह इतिहास का वह कालखंड है जिसका कोई लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं है। इसका केवल पुरातात्विक स्रोत मिलता है। जैसे मानव के कंकाल, पहिया,पत्थर के औजार इत्यादि। इसे पाषाण काल भी कहा जाता है।

इतिहास की परिभाषा
चित्र संख्या 1

2.आद्यएतिहासिक (proto-historic)-

यह इतिहास का वह कालखंड है जिसका लिखित स्रोत उपलब्ध है किंतु वह पढ़ा नहीं जा सकता। उदाहरण के लिए सिंधु घाटी की सभ्यता जिसे हम हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को सिंधु घाटी सभ्यता के कई लेख प्राप्त हुए किंतु उनमें इतनी जटिल भाषा का प्रयोग किया गया है जिसे समझ पाना नामुमकिन है। इस कालखंड के बारे में भी पुरातात्विक स्रोतों से ही पता लगाया जा सकता है।

चित्र संख्या 2

3. ऐतिहासिक (historic)-

यह इतिहास का वह कालखंड है जिसका पुरातात्विक स्रोत तो है ही और साथ ही साथ लिखित स्रोत भी उपलब्ध है। जिनका अध्ययन करके इनके बारे में अधिक से अधिक और सटीक जानकारी हासिल की जा सकती है।

इसके अंतर्गत हम निम्नलिखित भागों का अध्ययन करते हैं।

(क) प्राचीन इतिहास

(ख) मध्यकालीन इतिहास

(ग) आधुनिक इतिहास

(घ) समकालीन इतिहास

चित्र संख्या 3 – आधुनिक तथा मध्यकालीन समाज

आशा करता हूं कि इस लेख से आपको इतिहास और इतिहास के भागों के बारे में अच्छे से समझ में आया होगा। अगले लिखने हम इन सभी का विस्तार पूर्वक वर्णन करेंगे।

मानव की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए नीचे दी हुई लिंक पर क्लिक करें…

मानव की उत्पत्ति

होमो इरेक्टस

होमो इरेक्टस।। होमो इरेक्टस के लक्षण।। होमो इरेक्टस की पहचान।। मानव की होमो इरेक्टस प्रजाति कहां रहते थे।। होमो इरेक्टस की शाखाएं।।

होमो इरेक्टस-

जैसा कि हमने अपनी पिछली पोस्ट में आप लोगों को मानव की विभिन्न प्रजातियों के बारे में अवगत कराया था। इनमें पोंगिडे (गोरिल्ला व चिंपांजी) होमोनिड, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस, होमो सेपियंस तथा होमो सेपियंस सेपियंस थे। पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है की होमो इरेक्टस प्रजाति में ही आधुनिक मानव के लक्षण दिखने लगे थे। होमो इरेक्टस का “होमो” शब्द “ह्यूमन” से लिया गया है तथा “इरेक्ट” का अर्थ होता है “सीधा खड़ा”। मानव की विभिन्न प्रजातियों में होमो इरेक्टस में सबसे पहले सीधे खड़े होने के लक्षण दिखे। अतः इन्हें “होमो इरेक्टस” कहा गया।  पुरातत्ववेत्ता लीकी ने प्राप्त कंकालों से यह अनुमान लगाया था कि होमो इरेक्टस 50 लाख वर्ष पूर्व  से लेकर 3 लाख वर्ष पूर्व के बीच रहे होंगे।

होमो इरेक्टस चित्र संख्या 1

होमो इरेक्टस के साक्ष्य-    

होमो इरेक्टस के प्रमाण सर्वप्रथम अफ्रीका में मिले थे बाद में इनके प्रमाण विश्व के कई स्थानों में मिले जो कि निम्नलिखित है। एशिया – फिलिस्तीन, इजरायल, इराक, सीरिया, जावा, फिलीपींस, चीन के कुछ हिस्से, भारत, पाकिस्तान तथा इंडोनेशिया                                                                यूरोप– फ्रांस, जर्मनी, स्पेन तथा पूर्वी यूरोप      

अफ्रीका-इथोपिया, तंजानिया तथा कीनिया 

होमो इरेक्टस चित्र संख्या 2

होमो इरेक्टस के लक्षण- शारीरिक बनावट-  

होमो इरेक्टस के कंकाल निश्चित रूप से आधुनिक मानव की तरह थे। होमो इरेक्टस थोड़े मोटे और नाटे थे, सिर और चेहरा ‘आदिम’ रूप में थे, ललाट पीछे की ओर निकला हुआ और भौहें उन पर हावी थी। होमो हैबिलिस की तुलना में मस्तिष्क बड़ा था और चेहरा भी कम बाहर निकला हुआ था। ठुड्डियां भी आधुनिक मानव की तरह बनने लगी थी परंतु अभी तक उनका पूरी तरह से विकास नहीं हो सका था। उनके मस्तिष्क आकार लगभग 900-1100  सीसी था।

होमो इरेक्टस चित्र संख्या 3

होमो इरेक्टस की जीवन शैली-

होमो इरेक्टस प्राकृतिक गुफाओं के साथ-साथ अंडाकार या वृत्ताकार घरों में 30- 35 लोगों के समूह में रहते थे। यह घर पेड़ की शाखाओं और जानवरों की खाल से बनाए जाते थे। इन घरों में मिले चूल्हों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह नियमित रूप से आग का इस्तेमाल करते थे और मांस को भूनकर या बर्तनों में पका कर खाते थे। ये हर रोज शिकार किया करते थे। शिकार के लिए केवल पुरुष ही जाते थे जबकि महिलाएं कंदमूल और अन्य भोजन पदार्थ इकट्ठा करती थी मानव समूह आमतौर पर अलग-अलग रहा करते थे परंतु किसी खास समय और मौसम में एक साथ इकट्ठे हो जाया करते थे। समूह का इधर-उधर जाना एक सीमित क्षेत्र के भीतर ही होता था।

दोस्तों आशा करते हैं कि इस लेख के माध्यम से आप लोग होमो इरेक्टस के लक्षण, उनके साक्ष्य तथा उनकी जीवन शैली के बारे में समझ चुके होंगे।

मानव का क्रमिक विकास।। मानव का शारीरिक विकास।।  मनुष्य की उत्पत्ति का इतिहास।।होमिनिडे।। होमो हेबिलिस।। होमो इरेक्टस।।होमो सेपियंस। आधुनिक मानव का जन्म।।

मानव का क्रमिक विकास

       मानव का क्रमिक विकास – पृथ्वी पर मनुष्य की उत्पत्ति लगभग 60 मिलियन वर्ष पूर्व से माना जाता है। आधुनिक मानव, जिन्हें हम होमो सेपियंस सेपियंस कहते हैं, का क्रम, विकास के विभिन्न चरणों से गुजर कर विकसित हुआ है। इस पोस्ट में हम मानव के नरवानर रूप से आधुनिक मानव तक का सफर, उनकी शारीरिक बनावट आदि को समझने का प्रयास करेंगे

मनुष्य के क्रमिक विकास के प्रश्न के पूरे दो आयाम हैं पहला जैविक क्रमविकास तथा दूसरा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रमविकास। जैविक क्रमविकास का अध्ययन आदि रूप से आधुनिक मनुष्य तक मुख्य रूप से चेहरे की बनावट, मांस पेशियों, हड्डियों के ढांचे, अंग, एड़ी उंगली और मस्तिष्क के आकार आदि में होने वाले परिवर्तनों की मदद से किया जा सकता है जबकि सामाजिक और सांस्कृतिक क्रमविकास का पता लगाने के लिए मानव के बदलते परिवेश और उस बदलते परिवेश से मनुष्य की आदतों और स्वभाव में परिवर्तन को रेखांकित किया जाता है।

मानव का क्रमिक विकास मानव की कई शाखाओं से होकर गुजरता है। इनमें नरवानर, होमिनिडे, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस, होमो सेपियंस तथा होमो सेपियंस सेपियंस प्रमुख हैं। आइए हम क्रमानुसार एक एक का अध्ययन करते हैं-                                                                 

(1) नरवानर (पौंगिडे) गुरिल्ला व चिंपांजी-

इन्हें हमारा पूर्वज भी कहा जाता है। पाषाणित (फॉसिल) अवशेष दिखाते हैं कि इनके अंगूठे का स्वरूप, आगे की ओर स्थित कोटर और दातों का आकार प्रकार मनुष्य की तरह दिखाई पड़ता है। उनके मस्तिष्क का आकार लगभग 400-500 सीसी था।

(2) होमिनिडे-

होमिनिडे पूर्व और दक्षिण अफ्रीका के बड़े और खुले परिवेश में रहते थे। मुख्य रूप से इनके अवशेष इसी क्षेत्र में पाए गए। होमिनिडे शाखा ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो में विभाजित था जो पोंगिडे से अलग थे। 3.4 से 4 मिलियन वर्ष पूर्व होमिनिडे दो पैरों पर चलने लगे थे जिससे शरीर का सारा भार पैरों पर आ गया और हाथ दूसरे कामों के लिए मुक्त हो गए और क्रियाशील हो गये ।

(3) होमो हेबिलिस –

3.5 मिलियन वर्ष से लेकर 1.5 मिलियन वर्ष तक ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो के बीच का अंतर पैदा हुआ। विकास की यह प्रक्रिया बिल्कुल सीधी नहीं थी इसमें कई जटिलताएं थी। होमो हेबिलिस इनमें से एक विकसित होती हुई शाखा थी जिन्होंने संभवत सबसे पहले औजार बनाएं यह मुख्य रूप से अफ्रीकावासी थे। इनके मस्तिष्क का आकार लगभग 700 सीसी था

(4) होमो इरेक्टस –

अभी तक प्राप्त अवशेषों में होमो इरेक्टस की शारीरिक बनावट की कुछ खास विशेषताएं थी। मशहूर पुरातत्ववेत्ता रिचर्ड ई.लीकी ने यह अनुमान लगाया था कि ये 50 लाख वर्ष पूर्व से लेकर लगभग 3 लाख वर्ष पूर्व के बीच रहे होंगे जब होमो सेपियंस विकसित होना शुरू हुआ। होमो इरेक्टस के कंकाल यूरोप, पश्चिमी एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और इंडोनेशिया में पाए गए हैं। आज की तुलना में उस समय का मनुष्य थोड़ा मोटा और नाटा था, सिर और चेहरा ‘आदिम’ रूप में थे, ललाट पीछे की ओर निकला हुआ और भौहें उन पर हावी थी। होमो हैबिलिस की तुलना मस्तिष्क बड़ा था और चेहरा भी कम बाहर निकला हुआ था। ठुड्डियां भी आधुनिक मानव की तरह बनने लगी थी परंतु अभी तक उनका पूरी तरह से विकास नहीं हो सका था। उनके मस्तिष्क आकार लगभग 900-1100  सीसी था।

(5) होमो सेपियंस-

होमो इरेक्टस से होमो सेपियंस बनने की प्रक्रिया बहुत ही धीमी थी। यह विश्व के अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग समय पर विकसित हुआ।  होमो सेपियंस का क्रमिक विकास एक लगातार होने वाली प्रक्रिया के तहत हुआ। होमो सेपियंस की दो शाखाएं विकसित हुई इनमें से एक निएंडरथैलेनिस थी थी जिसका पहला कंकाल जर्मनी के निएंडर घाटी में मिला। ये निएंडरथल ठिगने और गठीले होते थे। इनकी ठुड्डियां चिपकी होती थी, भौहें स्पष्ट होती थी, ललाट छोटा होता था और कपाल की छमता औसतन 1450 सीसी हुआ करती थी। लगभग 35000 वर्ष पूर्व इनका समूल नाश हो गया और इनका कोई भी वंशज नहीं बचा। दूसरा क्रोमैग्नाॅन मानव जो आगे चलकर आधुनिक मानव में परिवर्तित हुए।

(6)होमो सेपियंस सेपियंसआधुनिक मानव-

पुरातत्ववेत्ता रिचर्ड ई.लीकी के अनुसार “यदि हम होमो लाइन के क्रमिक विकास को देखें और इसे पर्यावरणात्मक परिवेश की अपेक्षा शारीरिक क्षमताओं के कार्य के रूप में देखें तो यह कल्पना करना संभव है कि होमो इरेक्टस आबादी पूरे विश्व में विकास और प्रौद्योगिकी के दोहन पर अधिक से अधिक आश्रित होते चले गए और इससे उनकी चयन प्रक्रिया तय हुई जिसके फलस्वरूप यह प्रजातियां होमोसेपियंस की ओर अग्रसारित हुई। दुनिया के हर उस हिस्से में जहां होमोइरेक्टस का अस्तित्व था वहां स्वाभाविक रूप से होमोसेपियंस के आरंभिक रूप का जन्म हुआ। संस्कृति की मांग के फलस्वरुप चयन प्रक्रिया जारी रही और होमोसेपियंस के आरंभिक आबादी से होमो सेपियंस सेपियंस यानी आधुनिक मानव का जन्म हुआ।

मानव

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