मानव का क्रमिक विकास –
मानव का क्रमिक विकास – पृथ्वी पर मनुष्य की उत्पत्ति लगभग 60 मिलियन वर्ष पूर्व से माना जाता है। आधुनिक मानव, जिन्हें हम होमो सेपियंस सेपियंस कहते हैं, का क्रम, विकास के विभिन्न चरणों से गुजर कर विकसित हुआ है। इस पोस्ट में हम मानव के नरवानर रूप से आधुनिक मानव तक का सफर, उनकी शारीरिक बनावट आदि को समझने का प्रयास करेंगे
मनुष्य के क्रमिक विकास के प्रश्न के पूरे दो आयाम हैं पहला जैविक क्रमविकास तथा दूसरा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रमविकास। जैविक क्रमविकास का अध्ययन आदि रूप से आधुनिक मनुष्य तक मुख्य रूप से चेहरे की बनावट, मांस पेशियों, हड्डियों के ढांचे, अंग, एड़ी उंगली और मस्तिष्क के आकार आदि में होने वाले परिवर्तनों की मदद से किया जा सकता है जबकि सामाजिक और सांस्कृतिक क्रमविकास का पता लगाने के लिए मानव के बदलते परिवेश और उस बदलते परिवेश से मनुष्य की आदतों और स्वभाव में परिवर्तन को रेखांकित किया जाता है।
मानव का क्रमिक विकास मानव की कई शाखाओं से होकर गुजरता है। इनमें नरवानर, होमिनिडे, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस, होमो सेपियंस तथा होमो सेपियंस सेपियंस प्रमुख हैं। आइए हम क्रमानुसार एक एक का अध्ययन करते हैं-
(1) नरवानर (पौंगिडे) गुरिल्ला व चिंपांजी-
इन्हें हमारा पूर्वज भी कहा जाता है। पाषाणित (फॉसिल) अवशेष दिखाते हैं कि इनके अंगूठे का स्वरूप, आगे की ओर स्थित कोटर और दातों का आकार प्रकार मनुष्य की तरह दिखाई पड़ता है। उनके मस्तिष्क का आकार लगभग 400-500 सीसी था।
(2) होमिनिडे-
होमिनिडे पूर्व और दक्षिण अफ्रीका के बड़े और खुले परिवेश में रहते थे। मुख्य रूप से इनके अवशेष इसी क्षेत्र में पाए गए। होमिनिडे शाखा ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो में विभाजित था जो पोंगिडे से अलग थे। 3.4 से 4 मिलियन वर्ष पूर्व होमिनिडे दो पैरों पर चलने लगे थे जिससे शरीर का सारा भार पैरों पर आ गया और हाथ दूसरे कामों के लिए मुक्त हो गए और क्रियाशील हो गये ।
(3) होमो हेबिलिस –
3.5 मिलियन वर्ष से लेकर 1.5 मिलियन वर्ष तक ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो के बीच का अंतर पैदा हुआ। विकास की यह प्रक्रिया बिल्कुल सीधी नहीं थी इसमें कई जटिलताएं थी। होमो हेबिलिस इनमें से एक विकसित होती हुई शाखा थी जिन्होंने संभवत सबसे पहले औजार बनाएं यह मुख्य रूप से अफ्रीकावासी थे। इनके मस्तिष्क का आकार लगभग 700 सीसी था
(4) होमो इरेक्टस –
अभी तक प्राप्त अवशेषों में होमो इरेक्टस की शारीरिक बनावट की कुछ खास विशेषताएं थी। मशहूर पुरातत्ववेत्ता रिचर्ड ई.लीकी ने यह अनुमान लगाया था कि ये 50 लाख वर्ष पूर्व से लेकर लगभग 3 लाख वर्ष पूर्व के बीच रहे होंगे जब होमो सेपियंस विकसित होना शुरू हुआ। होमो इरेक्टस के कंकाल यूरोप, पश्चिमी एशिया, दक्षिण एशिया, चीन और इंडोनेशिया में पाए गए हैं। आज की तुलना में उस समय का मनुष्य थोड़ा मोटा और नाटा था, सिर और चेहरा ‘आदिम’ रूप में थे, ललाट पीछे की ओर निकला हुआ और भौहें उन पर हावी थी। होमो हैबिलिस की तुलना मस्तिष्क बड़ा था और चेहरा भी कम बाहर निकला हुआ था। ठुड्डियां भी आधुनिक मानव की तरह बनने लगी थी परंतु अभी तक उनका पूरी तरह से विकास नहीं हो सका था। उनके मस्तिष्क आकार लगभग 900-1100 सीसी था।
(5) होमो सेपियंस-
होमो इरेक्टस से होमो सेपियंस बनने की प्रक्रिया बहुत ही धीमी थी। यह विश्व के अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग समय पर विकसित हुआ। होमो सेपियंस का क्रमिक विकास एक लगातार होने वाली प्रक्रिया के तहत हुआ। होमो सेपियंस की दो शाखाएं विकसित हुई इनमें से एक निएंडरथैलेनिस थी थी जिसका पहला कंकाल जर्मनी के निएंडर घाटी में मिला। ये निएंडरथल ठिगने और गठीले होते थे। इनकी ठुड्डियां चिपकी होती थी, भौहें स्पष्ट होती थी, ललाट छोटा होता था और कपाल की छमता औसतन 1450 सीसी हुआ करती थी। लगभग 35000 वर्ष पूर्व इनका समूल नाश हो गया और इनका कोई भी वंशज नहीं बचा। दूसरा क्रोमैग्नाॅन मानव जो आगे चलकर आधुनिक मानव में परिवर्तित हुए।
(6)होमो सेपियंस सेपियंस– आधुनिक मानव-
पुरातत्ववेत्ता रिचर्ड ई.लीकी के अनुसार “यदि हम होमो लाइन के क्रमिक विकास को देखें और इसे पर्यावरणात्मक परिवेश की अपेक्षा शारीरिक क्षमताओं के कार्य के रूप में देखें तो यह कल्पना करना संभव है कि होमो इरेक्टस आबादी पूरे विश्व में विकास और प्रौद्योगिकी के दोहन पर अधिक से अधिक आश्रित होते चले गए और इससे उनकी चयन प्रक्रिया तय हुई जिसके फलस्वरूप यह प्रजातियां होमोसेपियंस की ओर अग्रसारित हुई। दुनिया के हर उस हिस्से में जहां होमोइरेक्टस का अस्तित्व था वहां स्वाभाविक रूप से होमोसेपियंस के आरंभिक रूप का जन्म हुआ। संस्कृति की मांग के फलस्वरुप चयन प्रक्रिया जारी रही और होमोसेपियंस के आरंभिक आबादी से होमो सेपियंस सेपियंस यानी आधुनिक मानव का जन्म हुआ।“

bahut accha likhe hai sir…
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Very helpful sir
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